23. समाधियाँ दे प्रदेश में (तेइसवीं कड़ी)


समाधियाँ दे परदेस च (त्रेह्मी कड़ी)


सारी फौज दा प्रशासन कनै प्रबंधन सेना निर्देश (आर्मी इंस्ट्रक्शन्ज) कनै सेना आदेश (आर्मी ऑर्डर्स) दे मुताबिक चलदा है।  सेना निर्देशां कनै सेना आदेशां च दो खास फर्क होंदे हन्न ― पहला फर्क है, सेना निर्देश भारत सरकार कनै  सेना आदेश थल सेना प्रमुख दे जरिए ज़ारी कित्ते जांदे हन्न जदकि दूजा फर्क है सेना निर्देश फाइनेंशियल मैटर कन्नै ताल्लुक रखदे जदकि  सेना आदेशां दा ताल्लुक एडमिनिस्ट्रेशन कन्नै होंदा है।  सेना आदेश थलसेना अध्यक्ष दे एडमिनिस्ट्रेटिव ऑर्डर होंदे हन्न कनै तिन्हां ऑर्डरां च सेना निर्देशां जो लागू करने दी विधि दा विस्तार च जिक्र होंदा है। वायुसेना कनै जलसेना दे निर्देश कनै आदेश भी इस तरहां दे ही होंदे हन्न। 


इन्हां निर्देशां कनै आदेशां दे इलावा हरेक, छोटी-बड्डी, यूनिट दे कमान अफसर दो तरहां दे ऑर्डर छापदे  हन्न – पार्ट वन ऑर्डर कनै पार्ट टू ऑर्डर। मोटे तौर पर बोली सकदे कि इन्हां ऑर्डरां कन्नै उप्पर लिक्खेयां सेना निर्देशां कनै आदेशां जो यूनिट दे लेवल पर लागू कित्ता जांदा है।  'पार्ट वन ऑर्डर'  यूनिट दे कमान अफसर दे एडमिनिस्ट्रेटिव ऑर्डर होंदे हन्न।  जदकि अपणे  'पार्ट टू ऑर्डरां' च इक कमान अफसर अपणे अंडर कम्म करने वाळे सारे अफसरां, जूनियर कमीशंड अफसरां कनै दूजेयां रैंकां दे सर्विस कैरियर दे दौरान होणे वाळियां घटनां जो छापदा है- जिंञा प्रमोशन, ट्रेड क्लास दे इम्तिहान पास करना, छुट्टी ओंणा-जाणा, परमानैंट कनै टेम्पररी डियूटी पर ओंणा-जाणा, कुसी कोर्स जो पास करना, ब्याह करना जां तलाक लैणा, बच्चे पैदा होणा, बगैरा बगैरा।  एह्  'पार्ट टू आर्डर' किछ तदेह् ही होंदे हन्न जदेह् सरकारी सिविल महकमेयां च 'ऑफिस ऑर्डर' होंदे हन्न। 


अफसरां कन्नै ताल्लुक रखणे वाळे 'पार्ट टू ऑर्डरां' पर कमांडिंग अफसर दस्तखत करदे हन्न अपर इक आम यूनिट दे जेसीओ कनै जुआनां दे 'पार्ट टू ऑर्डरां' पर कमांडिंग अफसर दे हत्थां कन्नै दस्तखत होई पाणा आमतौर पर मुमकिन नीं होंदा।  इस तांईं कमांडिंग अफसर इस बारे च अपणी पॉवरां जो अपणे सब-यूनिट कमांडरां (बैटरी/कंपनी कमांडरां) जो देई दिंदे हन्न अपर 'पार्ट टू आर्डरां' दी सिलसिलेवार गिणती जो, कमांडिंग अफसर दिया तरफा ते, यूनिट हेडकुआटर कंट्रोल करदा है। 


जिस तरहां सिविल सरकारी महकमेयां च कम्म करने वाळे हर कुसी दी 'सर्विस बुक' तिस महकमे दे दफतर च मेन्टेन कित्ती जांदी है, ठीक उइंञा ही फौजियां दी 'शीट रोल' फौज दी हर रेजिमेंट जां कोर दे रिकॉर्ड ऑफिस च मेन्टेन कित्ती जांदी है।  इक रेजिमेंट जां कोर दा रिकॉर्ड ऑफिस बहोत बड्डा दफ्तर होंदा है जिस च बहोत बड्डी गिणती च फौजी कनै सिविलियन क्लर्क कम्म करदे हन्न।  


सिविल सरकारी महकमेयां च कम्म करने वाळेयां दे  वेतन-भत्तेयां दा लेखा-जोखा अक्सर तिन्हां दे लोकल दफ्तर च रक्खेया जांदा है।  इस दे उल्ट इक रेजिमेंट जां कोर दे सारे जेसीओ कनै जुआनां दे वेतन-भत्तेयां दा लेखा-जोखा तिस रेजिमेंट जां कोर दा वेतन लेखा कार्यालय (पे एंड एकाउंट्स ऑफिस/पी ए ओ) सेंट्रली रखदा है। तिस दफ्तर च हर फौजी दा 'इंडिविजुअल रनिंग लेजर एकाउंट' (आई आर एल ए) मेन्टेन कित्तेया जांदा है। येह् दफ्तर 'कंट्रोलर ऑफ डिफेंस एकाउंट्स' (सीडीए) दे तहत कम्म करदा है। 


फौज दे अफसरां दे सर्विस रिकॉर्ड, आर्मी हैडकुआटर च रखे जांदे हन्न कनै तिन्हां दे वेतन-भत्तेयां दा लेखा-जोखा "कंट्रोलर ऑफ डिफेंस एकाउंट्स 'ऑफिसर्स" (सीडीए 'ओ') पुणे रखदा है। 


अफसरां/जेसीओ-जुआनां दे रिकॉर्ड ऑफ सर्विस/शीट रोल कनै 'इंडिविजुअल रनिंग लेजर एकाउंट' (आई आर एल ए) जो यूनिट च रखणा कनै मेन्टेन करना अमल करने लायक नीं होंदा किंञा कि यूनिटां अपणी जगहां बदळदियां  रैंह्दियां हन्न कनै तिन्हां जो मुखालफ हालातां च कम्म करना पोंदा है। 


हुण सुआल पैदा होंदा है कि यूनिटां ते दूर पोणे वाळे आर्मी हैडकुआटर/रिकॉर्ड ऑफिस कनै सीडीए (ओ)/पीएओ जो अफसरां/जेसीओ कनै दूजे रैंकां दे रिकॉर्ड ऑफ सर्विस/शीट रोल कनै 'इंडिविजुअल रनिंग लेजर एकाउंट' (आईआरएलए) जो मेन्टेन करने तांईं ज़रूरी डेटा कुत्थू ते मिलदा है? उसदा जवाब है, सैह् डेटा तिन्हां जो यूनिट दे 'पार्ट टू ऑर्डर' ते मिलदा है जिस दियां कॉपियां  तिन्हां जो यूनिटां, रजिस्टर्ड डाक दे जरिये भेजदियां हन्न। 


जेसीओ कनै जुआनां जो तनख्वाह देणे दा कम्म मिंजो अपणी फौजी जिंदगी दे दौरान सब्भ ते मुश्किल कम्म लगदा था। हालाँकि फौज दे कायदे-कनून दे मुताबिक तनख्वाह बंडणे दा कम्म इक कमीशंड ऑफिसर ही करी सकदा है अपर हकीकत च सैह् कम्म क्लर्क करदे थे।  तिस मामले च तैयार कित्ते गै कागदां पर अफसर सिरफ दस्तखत मात्र करदे थे। जेसीओ जां जुआन दी कितणी तनख्वाह बणदी थी, तिस जो गिणी करी क्लर्क अक्यूईटैंस रोल (Acquittance Roll) तैयार करदा था। अक्यूईटैंस रोल इक छपेह्या स्टैण्डर्ड आर्मी फॉर्म होंदा था।  तिस च हर जेसीओ कनै जुआन दा आर्मी नंबर, रैंक, नां, पिछला 'पे बुक' नंबर, तिसदी तारीख कनै मौजूदा 'पे बुक' नंबर टाइप कित्तेह्या जां लिखेह्या होंदा था। इक पन्ने दी इक अक्यूईटैंस रोल च सिर्फ ग्यारह आदमियों तांई जगह होंदी थी।  हर अक्यूईटैंस रोल दियां इक ते ज्यादा कॉपियां बणदियां थियां।  ऑफिस कॉपी च हर जुआन जो देणे वाळी रकम जो क्लर्क तिस जुआन दे नां दे अग्गैं पेंसिल कन्नै लिखी दिंदा था। हर जेसीओ कनै जुआन अपणी रकम दे साह्म्णे पहलैं ही दस्तखत करी दिंदा था।  पेंसिल कन्नै लिखी होई रकम दा भुगतान करी नै, अफसर तिस जो अपणे पेन कन्नै लिखी दिंदा था कनै ग्यारहां जुआनां जो भुगतान करी नै अक्यूईटैंस रोल च कित्ते गै कुल भुगतान जो हिणसेयां कनै अक्खरां च लिखी दिंदा था जेह्ड़ा पेंसिल च पहलैं ही लिखेह्यो होंदे थे।  तिस दे इलावा अफसर तिस अक्यूईटैंस रोल दे निचले हिस्से च दित्तेह्यो सर्टिफिकेट पर दस्तखत करदा था, जिस च लिखेह्या होंदा था कि तिन्नी भुगतान करने दे बारे च सारे कायदे-कनून पढ़ी करी समझी लैह्यो कनै खुद जुआन जो दित्तिह्यो रकम दी गिणती कित्तिह्यो कनै ओवर पेमेंट होणे पर तिसदी भरपाई सैह् खुद करह्गा। 


अफसरां दे वेतन कनै भत्तेयां दी रकम दा भुगतान, सीडीए (ओ) पुणे दी मार्फत, तिन्हां दे पर्सनल बैंक खातेयां च हर महीने होई जांदा था अपर जेसीओ कनै जुआनाँ जो भुगतान करने दा तरीका बिल्कुल वखरा था। 


जिंञा कि उप्पर दस्सेया गिह्या है, वेतन लेखा कार्यालय हर जेसीओ कनै जुआन दे तनख्वाह कनै भत्तेयां दा लेखा-जोखा तिन्हां दे 'इंडिविजुअल रनिंग लेजर एकाउंट' (आईआरएलए) च रखदा था।  वेतन लेखा कार्यालय हर तिन्न माह दे परंत यूनिट जो हर जेसीओ कनै जुआन दे बारे च क्वार्टरली स्टेटमेंट ऑफ एकाउंट भेजदा था जिस च दस्सेया होंदा था कि बीते तिन्न महीनेयां च तिस दा कितणा पैसा बणेया कनै तिन्नी कितणा पैसा कड्ढी लिया कनै हुण खाते च कितणा क्रेडिट जां डेबिट है।  जेकर खाता क्रेडिट दस्सा दा होए तां कोई गल नीं अपर जेकर डेबिट दस्सा दा होए तां कैलकुलेट करने वाळे क्लर्क जो तिसदा जवाब देणा पोंदा था कनै कई बरी कमांडिंग अफसर दी डांट झेलणी पोंदी थी।  तिस स्टेटमेंट ऑफ एकाउंट्स दा ज़रूरी ब्योरा दफ्तर दे इक रजिस्टर च दर्ज करी नै तिसा जो जेसीओ जां जुआन जो देई दिंदे थे। 


मिंजो येह् कम्म सब्भते मुश्किल कजो लगदा था — अगली कड़ी च।

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समाधियाँ दे प्रदेश में (तेइसवीं कड़ी) 


समस्त सेना का प्रशासन व प्रबंधन सेना निर्देश (आर्मी इंस्ट्रक्शनज) और सेना आदेश (आर्मी ऑर्डर्स) के अनुसार चलता है।  सेना निर्देशों और सेना आदेशों में दो मुख्य अंतर होते हैं ― पहला अंतर है, सेना निर्देश भारत सरकार और  सेना आदेश थल सेना प्रमुख द्वारा ज़ारी किए जाते हैं जबकि दूसरा अंतर है सेना निर्देश वित्तीय विषयों से संबंधित होते हैं जबकि सेना आदेशों का प्रशासनिक महत्व होता है।  सेना आदेश थलसेना अध्यक्ष के प्रशासनिक आदेश होते हैं और उन आदेशों में सेना निर्देशों को लागू करने की विधि का विस्तार से उल्लेख होता है।  इसी तरह से वायुसेना और जलसेना निर्देश और आदेश होते हैं। 


इन निर्देशों व आदेशों के अतिरिक्त प्रत्येक, छोटी व बड़ी, यूनिट के कमान अधिकारी दो प्रकार के आदेश प्रकाशित करते हैं – भाग एक आदेश (पार्ट वन ऑर्डर्स) और भाग दो आदेश (पार्ट टू ऑर्डर्स)। मोटे तौर पर कहा जा सकता है कि इन आदेशों द्वारा उपरोक्त सेना निर्देशों व आदेशों का यूनिट के स्तर पर क्रियान्वन किया जाता है।  'भाग एक आदेश'  यूनिट के कमान अधिकारी के प्रशासनिक आदेश होते हैं।  जबकि अपने  'भाग दो आदेशों' में एक कमान अधिकारी अपने अधीन सेवारत  समस्त अफसरों, जूनियर कमीशंड अफसरों व अन्य रैंकों के सर्विस कैरियर के दौरान होने वाली घटनाओं का प्रकाशन करता है जैसे पदोन्नति, ट्रेड क्लास परीक्षा उतीर्ण करना, अवकाश पर आना-जाना, स्थाई व अस्थाई ड्यूटी पर आना-जाना, किसी पाठ्यक्रम (कोर्स) को उतीर्ण करना, विवाह करना अथवा तलाक लेना, सन्तानोत्पति इत्यादि।  ये  'भाग दो आदेश' कुछ वैसे ही होते हैं जैसे सरकारी सिविल महकमों में 'ऑफिस ऑर्डर' होते हैं। 


अफसरों से संबंधित सभी 'भाग दो आदेश' कमांडिंग अफसर द्वारा हस्ताक्षरित होते हैं परंतु एक सामान्य यूनिट के जेसीओ और जवानों के 'भाग दो आदेशों' का कमांडिंग अफसर द्वारा हस्ताक्षरित हो पाना व्यावहारिक नहीं होता अत: कमांडिंग अफसर इस संबंध में अपनी शक्तियों को अपने सब-यूनिट कमांडरों (बैटरी/कंपनी कमांडरों) को दे देते हैं।  लेकिन भाग दो आदेशों की क्रम संख्या को, कमांडिंग अफसर की ओर से, यूनिट मुख्यालय नियंत्रित करता है। 


जिस प्रकार सिविल सरकारी महकमें में कार्यरत हर कर्मचारी की 'सर्विस बुक' उस महकमे के कार्यालय में मेन्टेन की जाती है, ठीक उसी तरह सैनिकों की 'शीट रोल' सेना की हर रेजिमेंट अथवा कोर के  अभिलेखागार (रिकॉर्ड ऑफिस) में मेन्टेन की जाती है। एक रेजिमेंट अथवा कोर का अभिलेखागार बहुत बड़ा कार्यालय होता है जिसमें बहुत बड़ी संख्या में  सैनिक व सिविलियन क्लर्क काम करते हैं।  


सिविल सरकारी महकमों में कर्मियों के वेतन-भतों का लेखा-जोखा अक्सर उनके स्थानीय कार्यालय में रखा जाता है।  इसके विपरीत एक रेजिमेंट अथवा कोर के समस्त जेसीओ व जवानों के वेतन-भतों का लेखा-जोखा उस रेजिमेंट अथवा कोर का वेतन लेखा कार्यालय (पे एंड एकाउंट्स ऑफिस/पी ए ओ) सेंट्रली रखता है। उस कार्यालय में हर सैनिक का 'इंडिविजुअल रनिंग लेजर एकाउंट' (आईआरएलए) मेन्टेन किया जाता है। यह कार्यालय 'कंट्रोलर ऑफ डिफेंस एकाउंट्स' (सीडीए) के अधीन कार्य करता है। 


सेना के अफसरों के सर्विस रिकॉर्ड, सेना मुख्यालय में रखे जाते हैं और उनके वेतन-भतों का लेखा-जोखा "कंट्रोलर ऑफ डिफेंस एकाउंट्स 'ऑफिसर्स" (सी डी ए 'ओ') पुणे द्वारा रखा जाता है। 


अफसरों/सैनिकों के रिकॉर्ड ऑफ सर्विस/शीट रोल तथा 'इंडिविजुअल रनिंग लेजर एकाउंट' (आई आर एल ए) को यूनिट में रखना और मेन्टेन करना व्यवहारिक नहीं होता क्योंकि यूनिटें अपना स्थान बदलती रहती हैं और उन्हें प्रतिकूल परिस्थितियों में काम करना पड़ता है। 


अब प्रश्न उठता है कि यूनिटों से दूर स्थित सेना मुख्यालय/अभिलेखागार(रिकॉर्ड ऑफिस) और सीडीए (ओ)/पीएओ को अफसरों/जेसीओ व अन्य रैंकों के रिकॉर्ड ऑफ सर्विस/शीट रोल और 'इंडिविजुअल रनिंग लेजर एकाउंट' (आईआरएलए) मेन्टेन करने के लिए ज़रूरी डेटा कहां से मिलता है? उसका उत्तर है, वह डेटा उन्हें यूनिट के 'भाग दो आदेशों' से मिलता है जिनकी प्रतियां उन्हें यूनिट द्वारा पंजीकृत डाक से प्रेषित की जाती हैं। 


जेसीओ और जवानों को वेतन देने का कार्य मुझे अपने सैन्य सेवा काल में सबसे अधिक कठिन कार्य  लगता था।  हालाँकि सेना के नियमों के अनुसार वेतन बांटने का कार्य एक कमीशंड ऑफिसर द्वारा ही किया जा सकता था परंतु वास्तव में वह कार्य क्लर्कों द्वारा किया जाता था।  उस संदर्भ में तैयार किए गए कागजात पर अफसर केवल हस्ताक्षर मात्र करते थे।  जेसीओ अथवा जवान का कितना वेतन बनता है इसकी गणना करके क्लर्क अक्यूईटैंस रोल (Acquittance Roll) तैयार करता था। अक्यूईटैंस रोल एक मुद्रित स्टैण्डर्ड आर्मी फॉर्म हुआ करता था।  उसमें हर जेसीओ व जवान का आर्मी नंबर, रैंक, नाम, पिछला 'पे बुक' नंबर, उसकी तारीख और वर्तमान 'पे बुक' नंबर टाइप किया अथवा लिखा हुआ होता था। एक पन्ने की एक अक्यूईटैंस रोल में केवल ग्यारह आदमियों के लिए जगह होती थी।  हर अक्यूईटैंस रोल की एक से अधिक प्रतियाँ बनाई जाती थीं।  ऑफिस कॉपी में हर व्यक्ति को देय राशि को क्लर्क उस व्यक्ति के नाम के आगे पेंसिल से लिख देता था।  हर जेसीओ व जवान स्वयं को देय राशि के आगे अपने हस्ताक्षर पहले ही कर देता था। अफसर पेंसिल से लिखी हुई राशि का व्यक्ति को भुगतान करके उसे अपने पेन से लिख देता था और ग्यारह व्यक्तियों को भुगतान करके उस अक्यूईटैंस रोल में किए गए कुल भुगतान को अंकों व शब्दों में लिख देता था जो पेंसिल से पहले ही लिख दिये गये होते थे।  इसके अतिरिक्त अफसर उस अक्यूईटैंस रोल के निचले भाग में दिए गए प्रमाणपत्र को हस्ताक्षरित करता था जिसमें लिखा होता था कि उसने भुगतान करने से संबंधित सभी नियमों को पढ़ कर समझ लिया है और स्वयं जवान को देय राशि की गणना की है व पात्रता से अधिक भुगतान हो जाने पर उसकी भरपाई वह स्वयं करेगा। 


अफसरों के वेतन व भत्तों की राशि का भुगतान सीडीए (ओ) पुणे द्वारा हर महीने उनके व्यक्तिगत बैंक खातों में कर दिया जाता था परंतु जे सी ओ और जवानों के बारे में भुगतान की प्रक्रिया बिल्कुल अलग थी। 


जैसे कि ऊपर कहा गया है, वेतन लेखा कार्यालय द्वारा हर जेसीओ और जवान के वेतन भत्तों का लेखा जोखा उसके 'इंडिविजुअल रनिंग लेजर एकाउंट' (आईआरएलए) में रखा जाता था।  वेतन लेखा कार्यालय हर तीन माह के उपरांत यूनिट को हर व्यक्ति के बारे में क्वार्टरली स्टेटमेंट ऑफ एकाउंट भेजता था, जिसमें दर्शाया गया होता था कि विगत तीन महीनों में उस व्यक्ति विशेष के वेतन-भत्तों की राशि कितनी बनी और उसने उसमें से कितनी राशि निकाल ली और अब खाते में कितना क्रेडिट अथवा डेबिट है।  खाता अगर क्रेडिट दिखा रहा होता तो कोई बात नहीं लेकिन अगर डेबिट दिखाता तो संबंधित क्लर्क को उसकी सफाई देनी पड़ती थी और कई बार कमांडिंग अफसर की डांट झेलनी पड़ती थी।  उस स्टेटमेंट ऑफ एकाउंट्स का ज़रूरी विवरण कार्यालय के एक रजिस्टर में दर्ज करके उसे संबंधित जेसीओ अथवा जवान को दे देते थे। 


मुझे यह काम सबसे कठिन क्यों लगता था—अगली कड़ी में।



      

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